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स्मार्ट फ़ोन नुकसान देह|Smartphone Harmless|AllBestNews||

छोटो बच्चो के रोने से रोकने और बहलाने लिए स्मार्ट फ़ोन देना आप के लिए महगा पड़ सकता है|बच्चे को दो साल की उम्र से पहले स्क्रीन एक्सपोजर नहीं होना चाहिए यहाँ तक कि किशोर-किशोरिया को भी हफ्ते में अधिकतम पांच घंटे ही स्मार्ट फ़ोन पर सोशल मिडिया का प्रोयोग करना चाहिए इससे उनका बोद्धिक विकास बाधित हो रहा है Indian साइकियाट्रिक सोसायटी ने पहली बार डिजिटल मिडिया(मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर,)के प्रयोग की गाइड लाइन पहली बार तैयार की है|यह जानकारी जनरल ऑफ़ साइकियाट्रि के एडिटर डॉ. ओम प्रकाश सिंग ने दी | वह गुरुवार को इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में 71 वीं नेशनल कन्फ्रेंश ऑफ इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी को संबोधित कर रहे थे | इस नेशनल कांफ्रेंस में भारत वा 14 देशो के करीब तीस हजार मनोचिकित्सक हिस्सा ले रहे थे |

Friday, February 1, 2019

/ by All Best News
Smartphone harmless
स्मार्ट फ़ोन से हानि|Smart Phone Se Haani|
छोटो बच्चो के रोने से रोकने और बहलाने लिए स्मार्ट फ़ोन देना आप के लिए महगा पड़ सकता है|बच्चे को दो साल की उम्र से पहले स्क्रीन एक्सपोजर नहीं होना चाहिए यहाँ तक कि किशोर-किशोरिया को भी हफ्ते में अधिकतम पांच घंटे ही स्मार्ट फ़ोन पर सोशल मिडिया का प्रोयोग करना चाहिए इससे उनका बोद्धिक विकास बाधित हो रहा है Indian साइकियाट्रिक सोसायटी ने पहली बार डिजिटल मिडिया(मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर,)के प्रयोग की गाइड लाइन पहली बार तैयार की है|यह जानकारी जनरल ऑफ़ साइकियाट्रि के एडिटर डॉ. ओम प्रकाश सिंग ने दी | वह गुरुवार को इंदिरा गाँधी प्रतिष्ठान में 71 वीं नेशनल कन्फ्रेंश ऑफ इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी को संबोधित कर रहे थे | इस नेशनल कांफ्रेंस में भारत वा 14 देशो के करीब तीस हजार मनोचिकित्सक हिस्सा ले रहे थे |
स्मार्ट फ़ोन कितने घंटे चलाये?Smart Phone Kitne Ghante Chalaye|
डॉ. ओम प्रकाश सिंह ने बताया की अधिकतम हफ्तों में छह धंटे ही स्मार्ट फ़ोन का प्रोयोग करना चाहिए | भारत में मौत का दूसरा बड़ा कारण किशोरवस्था में सुसाइड है और यह बिहैवियर एडिक्शन (व्यवहार में लत) होने के कारण हो रहा है | यही नहीं तनाव, डिप्रेसन, एंजाइटी वा एग्रेशन (आक्रामकता) बढ़ रही है | उन्हों ने कहा की महिलाओ वा पुरुषो को भी हफ्ते में अधिकतम छह घंटे ही स्मार्ट फ़ोन का प्रोयोग करना चाहिए | खासकर गृहणया और इसे पुरुष जो कामकाजी नहीं है | क्युकी इससे वह समाज से पूरी तरह से कटते जा रहे है और डिप्रेशन का शिकार बन रहे है | यही कारण है की पहली बार इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी द्वारा गाइड लाइन तैयार की है | इससे बच्चो से लेकर बड़े लोगो तक को हफ्ते में पांच से छह घंटे ही डिजिटल मिडिया का प्रोयोग करना चाहिए |
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