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अपने आप को जानना||AllBestNews||

अपने आप को जानना||AllBestNews|| कही पर कबीर दास बाबा ने कहा है- बुरा ढूढन को मै चला तो बुरा न मिला कोय, जब अपने को जाना तो मुझ से बुरा न कोय| अपने कौन है? क्या काम, क्रोध, मद, लोभ, सब तो बाबा ने ये क्यों कहा नाथ नरक के पंथ | सब परिहर रघुवीरह भजय भजव जेहि संत || अपने को जानना? अपने सत्य, दान, क्षमा मुख्य है जिन को लेकर चलना है/ आप कौन है? आप जीव आत्मा है, आप सत्य स्वरुप है अपने धर्म पर चलने वाले चारो वर्णों के धर्म भले अलग अलग हो पर आत्मा एक है/ अपने सत्य कर्म को न पहचान कर काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के चक्कर में ही हम आप पड़े रहते है, कही किसी ने कहा है|

Thursday, February 7, 2019

/ by All Best News
अपने आप को जानना

अपने आप को जानना

आत्म अनुभव सुख सु प्रकाशा | तव भव मूल भेद भ्रम नाशा ||

अपने कौन है?

क्या काम, क्रोध, मद, लोभ, सब तो बाबा ने ये क्यों कहा नाथ नरक के पंथ | सब परिहर रघुवीरह भजय भजव जेहि संत ||

अपने को जानना?

अपने सत्य, दान, क्षमा मुख्य है जिन को लेकर चलना है/

आप कौन है?

आप जीव आत्मा है, आप सत्य स्वरुप है अपने धर्म पर चलने वाले चारो वर्णों के धर्म भले अलग अलग हो पर आत्मा एक है/ अपने सत्य कर्म को न पहचान कर काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह के चक्कर में ही हम-आप पड़े रहते है, कही किसी ने कहा है|

हमें तो अपनों ने लूटा
गैर तो गैर है, गौरो में कहा दम था |

सबसे पहले हमें आपने आप को जानना है जब हम आपने आप को नहीं जानते तो आप को कैसे जानेगे/
अपने अन्दर और दुसरे के अन्दर दिव्य द्रष्टि से ही पता चलता है
जैसे एक्स्ट्रा पावर(अल्ट्रा साउंड)सब जान लेता है वैसे ही हमें अपने पॉवर चार्जिंग को (समझने की उर्जा)बढाना होगा/
दिव्य द्रष्टि को बढाना है तो दिव्य कर्म करेगें तभी दिव्य द्रष्टि बढेगी/

आप कौन है?

आप जीव आत्मा है क्युकी (ईस्वर अंश जीव अभिनासी) ईस्वर अंश जीव आत्मा है (चेतन अमल सहज सुख रासी) हम आप इसे कैसे झुठला सकते है/


अपने आप को जानना
अपने कौन है?


सबसे पहले हमें अपने आप को जानना है-

जब हम अपने को नहीं जानते तो आप को क्या जानेगे कोई कितना बुरा क्यों न हो लेकिन उसको तलास एक अच्छे इन्सान की रहती है क्यूकी उसे पता है अच्छा इन्सान ही सारे कार्य सही रूप से कर सकता है

कही पर कबीर दास बाबा ने कहा है-

बुरा ढूढन को मै चला तो बुरा न मिला कोय,
जब अपने को जाना तो मुझ से बुरा न कोय|

आज कल हम आप को चलने में अकेला ही महसूस होगा, पर महापुरषों ने अकेले ही कार्य को सिद्ध कर के दिखाया है सतयुग में अन्सुमान ने कपिल मुनि जी से अस्वा मेघ यज्ञ का घोडा ले आये थे, त्रेता में हनुमान जी संजीवनी ले आये थे द्वापर में महारथी अभिमन्यू जी चक्रव्यूह तोड़ कर दिखा गए, आज वर्तमान में स्वामी बाबा(राम देव) प्रमाण है|


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