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नर नारी को प्रोबोध,प्रेम व्यवहार|Male Woman Probeosh, Love Behavior||AllBestNews||

सुम्मति कब होगी? सुम्मति तभी होगी जब हम आप चैतन्य होगे/ जहा सुमति तहं सम्पति नाना | जहा कुमति तहं विपति निधाना || क्युकी बेल पात में भी कुछ अपने गुण होने चाहिए जो पेड़ के सहारे पेड़ की आखरी चोटी पर पहुच जाये और जहा तक हो सके दुसरो को सहारा देना सीखो लेना नहीं/

Monday, January 28, 2019

/ by All Best News
Male Woman Probeosh Love Behavior
नर नारी को प्रोबोध ,  प्रेम व्यवहार||AllBestNews||

प्रेम व्यवहार दोनों  के अलग अलग रूप

प्रेम गुन देख हो जाता है , व्येवहार हर किसी से किया जाता है |

व्येवहार और प्रेम के कितने रूप होते है?

वेवहार के कई रूप होते है लेकिन प्रेम के मात्र एक ही रूप है |

Ex: कावा और हंस

व्येवहार: कावे कि तरह चंचल होता है/

प्रेम: हंस कि तरह सामान्य रूप रहता है/

वेवहार में देखा गया है कि सब कुछ होते हुए भी कामना की इच्छा बलतह बनी रहती है पर प्रेम में ऐसा नहीं है क्यूकी (प्रेम) करुणा , तप , त्याग और वैराग से उत्पन्न हुआ है/

न कोई अपना है
न कोई पराया है

जब हम आप चैतन्य है तो सभी लोग अपने है जब से जड़ मूर्ख हो गए तो सब पराये हो गए/

दुःख में भाई होय न बंदा और बैल न देता कन्धा |

आप नर सरूप चैतन्य तो हमेसा से थे,और है
समता (सुम्मत) के कारण हम सब जुड़े है एक है नहीं तो कौन किसका बेटा कौन किसका भाई और कौन किसका मित्र वेवहारी है

चौ०: समता (सुम्मति) बिन सब गुन सुख कैसा , लवन बिना बहु विन्जन जैसा |

सुम्मति कब होगी?
Male Woman Probeosh Love Behavior
सुम्मति तभी होगी जब हम आप चैतन्य होगे/

चौ०: जहा सुमति तहं सम्पति नाना | जहा कुमति तहं विपति निधाना ||

क्युकी बेल पात में भी कुछ अपने गुण होने चाहिए जो पेड़ के सहारे पेड़ की आखरी चोटी पर पहुच जाये
और जहा तक हो सके दुसरो को सहारा देना सीखो लेना नहीं/

इन्सान जब अपने पराये सारे रास्ते बंद कर देता है तो ह्रदय में बैठे आत्मा रुपी परमात्मा भी रुष्ट हो जाते है और उसके ज्ञान को हर लेते है/तभी से इन्सान का विकास रुक जाता है/

इसी से कहा गया है-

चौ०: जो विधना दारुन दुःख दिना|अकिल बुद्धि पहले हर लीना||

चौ०: विषय कामना वस नर नारी | कौन अनर्थ न करहि अनारी ||

रास्ता बंद करने के बजाय रास्ता खोलना चाहिए , रास्ते से आप सब का विकास जुड़ा होता है चाहे मस्तिष्क का हो , या मोहल्ले का रास्ता अवरूध नहीं करना चाहिए रास्ते के जरिये ही देव गणों का आना जाना होता है/

चौ०: कौन  लाभ  है  जीवन  केहा | मन क्रम वचन राम पद नेहा ||
            लाभ  महान  मनुष्य  को  संत  संग  से ज्ञान |
            होय स्व वस मन आपना , भक्ति धरम पहिचान |
Writed By(Ram Shankar)
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